मनमोहन: मौन में प्रकट शुद्ध चैतन्य और सत्य का अनुभव
न मैं देह, न मैं मन, न स्मृति, न विचार का जाल,मौन साक्षी शुद्ध चैतन्य, यही सत्य निष्कल काल।जब-जब शांत […]
न मैं देह, न मैं मन, न स्मृति, न विचार का जाल,मौन साक्षी शुद्ध चैतन्य, यही सत्य निष्कल काल।जब-जब शांत […]
इस तरह चर्चा मे गुरूमां ने बताया कि अन्नमय कोष, जिसे शरीर का पोषण और आधार माना गया है, मनुष्य
मैने गुरुमां से निवेदनपूर्वक कहा, “माँ , अब मैं जानना चाहता हूँ कि अन्नमय कोष और मनोमय कोष का गहन
गुरुमां के चरणों मे बेठने का अवसर मिला तो मैने धीरे से कहा, “गुरुमां, अन्नमय शरीर, वह प्रथम आवरण जिसे
भारतीय ऋषि-मनीषियों और संतों ने मानव जीवन के अंतिम उद्देश्य को आत्मज्ञान और परम शांति की प्राप्ति बताया है। वर्तमान