
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न माया जाल।
श्वास-श्वास मनमोहन, निर्मल चित्त विशाल॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न तृष्णा शोर।
मनमोहन रस बरसता, अंतर नाचे मोर॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न राग-विकार।
मनमोहन की ज्योति से, उज्ज्वल हर द्वार॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न द्वेष निवास।
मनमोहन मुस्कान सा, फैला मधुर प्रकाश॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न भय की रीत।
मनमोहन स्पर्श से, धड़कन गावे गीत॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न काल प्रहार।
मनमोहन स्मरण बने, अटल अमर आधार॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न छल का जाल।
मनमोहन सच्चाई बने, जीवन का सुरताल॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न दूरी भेद।
मनमोहन सबमें मिले, मिटें जगत के खेद॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न तम का मेल।
मनमोहन दीपक जले, बिन बाती बिन तेल॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न बंधन भार।
मनमोहन उन्मुक्त नभ, चेतन पंख पसार॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ न कोई अंत।
मनमोहन स्वर गूँजता, जैसे अनहद संत॥
हम वास्तव में वह हैं, जहाँ सहजता धाम।
मनमोहन हर श्वास में, प्रकटे निज परधाम॥